Juvenile को Bail कैसे मिलती है? JJ Act में नाबालिग की जमानत कब रोकी जा सकती है?

मान लीजिए रात में पुलिस किसी 17 साल के बच्चे को एक आपराधिक मामले में पकड़कर कानून की प्रक्रिया में ले आती है। घरवालों को जैसे ही पता चलता है, पहला सवाल यही आता है— “अब क्या होगा? इसे जेल भेजेंगे या जमानत मिल सकती है?” और यहीं एक बहुत आम गलती होती है। लोग तुरंत सामान्य criminal case वाली bail की तस्वीर दिमाग में ले आते हैं—अपराध कितना गंभीर है, कितनी सजा हो सकती है, आरोप कितना बड़ा है। लेकिन अगर सामने वाला व्यक्ति कानून की नजर में child है और मामला किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत आता है, तो जमानत का सवाल उसी Act की अपनी statutory व्यवस्था के अनुसार देखना होगा। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण provision है— धारा 12, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015। और इसकी खास बात यह है कि कानून ने शुरुआत ही इस सोच से की है कि बच्चे को bail पर release करना सामान्य नियम है, जबकि release रोकना कुछ निर्धारित परिस्थितियों से जुड़ा है। लेकिन अब असली सवाल यह है— क्या इसका मतलब यह है कि नाबालिग ने कोई भी अपराध किया हो, उसे हर हालत में bail मिल जाएगी? नहीं। कानून ने यहीं तीन महत्वपूर्ण दरवाज़े भी बनाए हैं। और असली courtroom कहानी इन्हीं दरवाज़ों के बीच शुरू होती है। धारा 12, किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में Bail का मूल नियम क्या है? अब पिछली बात से सीधे आगे आइए। अगर यह मान लिया गया कि सामने वाला व्यक्ति apparently a child है और उस पर किसी अपराध का आरोप है, तो अगला सवाल है—जमानत के लिए कानून ने क्या व्यवस्था बनाई है? यहाँ हमें सीधे धारा 12, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 को पढ़ना होगा। इस धारा में कहा गया है कि ऐसा बच्चा, चाहे आरोपित अपराध bailable हो या non-bailable, सामान्यतः bail पर release किया जाएगा—बिना surety, surety के साथ, या probation officer/fit person की supervision या care में। अब जरा इसको सामान्य criminal case की सोच से अलग करके देखिए। लोग अक्सर पूछते हैं— “अपराध non-bailable है, तो juvenile को bail कैसे मिल सकती है?” यही तो इस provision की खास बात है। धारा 12, JJ Act, 2015 ने child के लिए bail का अपना statutory rule बनाया है। इसलिए केवल यह कह देना कि “offence non-bailable है”, अपने-आप juvenile bail का दरवाजा बंद नहीं करता। लेकिन Parliament ने दूसरी तरफ तीन स्थितियाँ भी साफ रखी हैं। अगर release से reasonable ground पर यह दिखाई दे कि बच्चा— किसी known criminal के association में जा सकता है; moral, physical या psychological danger में पड़ सकता है; या उसकी release से ends of justice defeat हो सकते हैं, तो bail रोकी जा सकती है। और एक महत्वपूर्ण बात—bail deny करने पर Board को reasons record करने होते हैं। यहीं courtroom में असली सवाल पैदा होता है। सिर्फ अपराध गंभीर है—क्या इतना कहना काफी है? मान लीजिए आरोप बहुत गंभीर है। Prosecution कहती है— “अपराध की nature देखिए, आरोप बहुत गंभीर है, बच्चे को बाहर नहीं भेजना चाहिए।” अब Board के सामने असली काम केवल offence का नाम पढ़ना नहीं है। धारा 12, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 में जो specific grounds दिए गए हैं, उन्हें उस particular child और available material के साथ जोड़कर देखना होगा। यानी— “अपराध गंभीर है” और “बच्चे की release से Section 12 की statutory conditions में से कोई condition वास्तव में बनती है” इन दोनों को एक ही बात मान लेना सही नहीं होगा। Supreme Court के सामने भी Section 12 की यही statutory structure आई है और Court ने provision को उसके अपने framework में पढ़ा है। Bail रोकने के तीन कारणों को Courtroom में कैसे समझें? अब इन तीन grounds को सिर्फ कानूनी शब्दों में पढ़कर आगे मत निकल जाइए। असली फर्क यहीं समझना है। 1. Known criminal के साथ association का खतरा मान लीजिए 17 साल का बच्चा पहली बार किसी मामले में फँसा है। बाहर आने के बाद वह ऐसे लोगों के संपर्क में जा सकता है जिनका criminal background है और जिनसे उसके दोबारा उसी तरह की गतिविधियों में जाने का वास्तविक खतरा पैदा हो सकता है। यहाँ सवाल केवल यह नहीं है कि— “उसने क्या किया था?” सवाल यह भी है— “Release के बाद वह किस environment में जाएगा?” यानी bail के समय बच्चे के surroundings भी कानूनी महत्व ले सकते हैं। 2. बच्चे के लिए moral, physical या psychological danger अब दूसरा scenario बिल्कुल उल्टा हो सकता है। मान लीजिए बच्चा ऐसे environment में वापस जाएगा जहाँ उसे खुद harm होने का खतरा है। तो यहाँ bail रोकने का सवाल punishment देने के लिए नहीं, बल्कि child की safety के angle से भी जुड़ सकता है। यही JJ Act की child-centric सोच को दिखाता है। कानून केवल यह नहीं देख रहा कि— “बच्चे ने बाहर जाकर क्या किया?” वह यह भी पूछ सकता है— “बाहर जाने के बाद बच्चे के साथ क्या हो सकता है?” 3. Release से ends of justice defeat होने की स्थिति यह सबसे broad और सबसे सावधानी से पढ़े जाने वाला ground है। सिर्फ शब्द पढ़कर यह मान लेना कि “ends of justice” मतलब कोई भी गंभीर allegation—इतना सीधा formula नहीं बनाया जा सकता। Board को अपने सामने मौजूद facts और circumstances के आधार पर reasoned decision लेना होगा। और यही कारण है कि bail reject करने का order सिर्फ एक line का निष्कर्ष नहीं होना चाहिए—Section 12 खुद reasons record करने की बात करता है। अगर Bail मिल गई लेकिन उसकी Conditions पूरी नहीं हो पा रहीं तो? यह एक practical situation है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। मान लीजिए Board ने bail दे दी। लेकिन बच्चा या उसका guardian bail order की conditions को पूरा नहीं कर पा रहा। अब क्या? किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 12(4) इस स्थिति को भी address करती है। अगर child bail order की conditions को सात दिनों के भीतर पूरा नहीं कर पाता, तो उसे Board के सामने produce किया जाना है ताकि bail conditions में modification पर विचार … Continue reading Juvenile को Bail कैसे मिलती है? 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